खास खबरें पंचक्रोशी यात्रा एवं अन्य पर्वों पर हो आचार संहिता का पूरा पालन कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग ने दी पीएम मोदी को क्‍लीन चिट श्रीलंका में हुए सीरियल ब्‍लॉस्‍ट के पीछे न्‍यूजीलैंड में हुए हमले का बदला बनी वजह एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप : गोमती ने जीता भारत के लिए पहला गोल्‍ड, शिवपाल ने जीता सिल्‍वर पंजाब की गुरदासपुर सीट से बीजेपी ने दिया सनी देओल को टिकट, चंडीगढ़ से किरण खेर प्रत्‍याशी अक्षय कुमार ने लिया पीएम मोदी का इंटरव्‍यू, मॉं के बारे में मोदी जी ने बताई ये खास बात... सेंसेक्स 38800 के पार, निफ्टी 11640 के आसपास युवक-युवती के संबंधों से नाराज थे ग्रामीण, खेत में करंट लगाकर ले ली प्रेमी की जान रोहित शेखर की हत्‍या के मामले में पुलिस को पत्‍नी पर शक, नौकर और ड्राईवर भी संदिग्‍ध संकष्‍टी चतुर्थी पर ऐसे करें भगवान श्रीगणेश की पूजा

बैतुल का किसान कर रहा है स्‍ट्रॉबैरी की खेती

बैतुल का किसान कर रहा है स्‍ट्रॉबैरी की खेती

Post By : Dastak Admin on 22-Apr-2019 21:28:10

strawberry farming


मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होने वाली स्ट्राबेरी को बैतूल जिले में उगाने के लिए एक किसान ने दो साल पहले जोखिम उठाया था। पहले साल तो निराशा हाथ लगी, लेकिन इस साल मौसम के बदलाव के चलते स्ट्रॉबेरी की बेहतर पैदावार होने से किसान को परंपरागत खेती से अधिक मुनाफा मिल रहा है। बैतूल जिले में स्ट्राबेरी की पैदावार की संभावना बेहद कम होने के बाद भी ग्राम बटामा के किसान नवनीत श्यामकिशोर वर्मा ने उसकी जैविक खेती करने का मन बनाया। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर पिछले साल दो एकड़ खेत में गन्नों की फसल के साथ स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए।

जनवरी और फरवरी माह में गर्मी होने के कारण पौधों में फूल आ गए और खेत में स्ट्रॉबेरी की लालिमा है। कृषि स्नातक युवा किसान नवनीत की मानें, तो एक पौधे से कम से कम 500 से 700 ग्राम पकी हुई स्ट्राबेरी निकल रही है। पूरी तरह से जैविक पद्धति से खेती करने के कारण वे इसकी पैकिंग कर जिले ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के भी बाजार तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी क्षेत्र का पौधा है और पॉली हाउस में ही उसकी पैदावार सही होती है।

इसके बावजूद उन्होंने खुले खेत में स्ट्राबेरी की फसल करने का जोखिम उठाया था। पहले दौर में 350 पौधे खरीदकर खेत में लगाए, लेकिन पाला पड़ने से पौधों की वृद्धि थम गई थी। जैविक पोषक तत्वों की मदद से उन्होंने पौधों को बीमारी और पाले से बचाया और अब उनसे भरपूर उत्पादन हासिल हो रहा है। परंपरागत खेती से हटकर नवनीत ने अब अपने खेत में लीची की खेती करने का निर्णय लिया है।

300 रुपए प्रति किलो बिकी स्ट्राबेरी
नवनीत ने बताया कि पौधों को धूप से बचाने लिए नेट लगाई है। जिससे फल खराब नहीं हो रहे हैं। उनके खेत में स्ट्राबेरी के पौधों से पूरी तरह जैविक स्ट्राबेरी की पैदावार हो रही है। इसे वे आधा किलो के एयर टाइट पैकेट में पैक कर बाजार में पहुंचा रहे हैं। बाजार में उनकी जैविक स्ट्राबेरी 300 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रही है।

Tags: strawberry farming

Post your comment
Name
Email
Comment
 

कृषि

विविध