‘‘ मां क्षमा करना हमें ’’- आर. बी. त्रिपाठी
‘‘ मां क्षमा करना हमें ’’- आर. बी. त्रिपाठी
Post By : Dastak Admin on 11-May-2026 15:21:32
मां क्षमा करना हमें आपका नाम ही क्षमा यथा नाम तथा गुण ममता, करुणा, स्नेह क्षमा की प्रतिमूर्ति सबकी परवाह करने वाली क्षमा बड़न को चाहिये इसे उतारा जीवन में आपके श्रीजी शरण बाद बहुत कुछ बदल गया मां लोग बदले माहौल बदला पराये हो गये वो सब जो कभी अपने रहे दिल और मन छोटे हुए मैं प्रयत्न करने पर भी नहीं बचा सका विरासत आपकी वे स्मृतियां सोचा था अमिट रखूंगा मंदिर जैसा घर था कभी अब मूक, उदास, उजाड़ जैसे अभी कुछ कह रहा आपके बनाये ‘‘ अल्पना ’’ आकर्षक कलर के मांडने घर की समृद्धि की ‘‘ पोती कपड़ों की चिंदियों और ऊन से बने आसन सलाइयों से बुनी स्वेटर कागज की लुगदी से बने वे दूमले जाने कहां खो से गये जब कुछ सुधारना चाहा अपनों ने ही विध्न किया रिश्तेदारों ने फोटो, वीडियो बनाये बेशर्म बनकर जिस घर में बाबूजी के शिष्यों की जुटती थी भीड़ वहां की सिद्धि खो गई स्वार्थपरता की आंधी में मुझसे झूठी उम्मीद बांधे छोटा सा घर वो मेरा नहीं हिस्सेदार वहां मौजूद मेरे- तेरे में मिट गई पूर्वजों की एक निशानी ऐसे ही मिट रहे दादाजी के खेत और बाग....
पूर्वजों का पुराना घर जो था हवेलीनुमा उसे भी मिटने दिया आपकी निशानियां बचती भी कैसे....
मैं अकेला ही खड़ा था इन धरोहर के सामने एकला चलो रे, की भांति सब तमाशबीन बन गये मां, इस पाप में हम भी भागीदार बना दिये गये भारी मन से विदा दे आये मोक्षधाम गयाजी पर लेकिन माता पिता विदा होते हैं कभी....
उनका वरद हस्त अपनी संतान पर से हटता नहीं मां, हो सके तो क्षमा करना खानदान की करतूतों को...
’ आर. बी. त्रिपाठी (यह सिर्फ कविता नहीं दखी मन के भाव समझना)


