सरकार-संगठन में कदमताल के बाद जुगलबंदी भी…- राघवेंद्र सिंह
सरकार-संगठन में कदमताल के बाद जुगलबंदी भी…- राघवेंद्र सिंह
Post By : Dastak Admin on 11-May-2026 15:29:27
अक्सर कहा जाता है कि सत्ता और संगठन में समन्वय व संतुलन की कमी खटकती है और उससे सारे काम अटकते हैं । मगर इस बार भाजपा में ऐसा कुछ दिखाई नही दे रहा है। यह अच्छा संकेत भी है और भाजपा में कार्यकर्ताओं के लिए अच्छा शगुन भी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस मामले में भाग्यशाली हैं कि उन्हें हेमंत विजय खंडेलवाल के रूप में लो प्रोफ़ोइल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मिला और किसी भी खाने से दोनो नेताओं के बीच तकरार और टकराहट जैसे कोई ख़बर सियासत की गलियों से होते हुए राजनीति के राजमार्ग तक नही आई है। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व काल में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा नंदू भैया (नंदकुमार सिंह चौहान) के अध्यक्षीय कार्यकाल को छोड़ दें तो समन्वय,संतुलन व सहजता के संबंध सत्ता संगठन में देखने कम ही मिले। इस पर सीएम डॉ यादव और अध्यक्ष खंडेलवाल को बधाई के साथ शुभकामनाएं भी। ऐसा इसलिए भी कि संगठन की सिफारिश पर नेता कार्यकर्ताओं की निगम मंडलों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के साथ प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर दौरा जारी है। इसमें अब तक सरकार-संगठन में कदम ताल के जुगलबंदी का दौर भी जारी है। बस त्रुटि से बचने के लिए इसमें निष्ठा ,सेवा -समर्पण का भी ध्यान रखा जाए तो सोने पर सुहागा हो सकता है।
नियुक्तियों में ब्रेक याने स्ट्रेटजिक टाइम आऊट…
भाजपा में निगम मंडलों में तैनाती के सिलसिले में थोड़ा ब्रेक लग सकता है। वजह है निर्णय थोड़ा और सोच विचार करके। ताकि असंतोष और असंतुलन से बचा जा सके। इसलिए अंदर खाने की खबर है कि जिस गति से धड़ाधड़ नियुक्तियां हो रही उसे कुछ हफ्तों के लिए टाल दिया है। इस मामले में सरकार के साथ संगठन में भी मंथन जारी है। अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल फूंक फूँककर कर काम करना चाहते हैं। करें भी क्यों न केंद्रीय नेतृत्व उन्हें लंबी रेस में रखना चाहता है क्योंकि वे सबको साध कर संतुलन बनाने का काम जो करते है। शायद मुख्यमंत्री के साथ उनकी संगत सियासत के बड़े उस्तादों से लेकर मध्यम व छोटे साजिंदों के साथ खूब बैठ जाती है।
कांग्रेस में आएगा दिग्विजय-नाथ का दौर?
पीसीसी को लेकर जिस तरह की राय और चर्चाएं दिल्ली दरबार से निकल कर आ रही ख़बरों ने नाथ व सिंह से दूरी बनाने की वकालत करने वालों को परेशान सा कर दिया है। ख़ास बात ये है दोनों नेताओं का तजुर्बा व नेटवर्क इतना तगड़ा है कि अगले चुनाव तक वे कांग्रेस की जरूरत भी और मजबूरी भी हैं। वरिष्ठ नेता कमलनाथ के संपर्क और कार्यकर्ताओं से दिग्विजय सिंह का जुड़ाव विवश करता है उन्हें मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए। खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत व मारक क्षमता से किसी को भी इंकार नही है।


